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Sunday, December 5, 2010

मोहब्बत


है आज दूर मुझसे कल मेरे पास होगी,
मेरी ये मोहब्बत बस मेरे पास होगी,
चाहें सितम जो दे दो, ग़म लाख मुझको दे दो,
फिर भी मेरी मोहब्बत कम तो कभी न होगी,
है दिल दीवाना मेरा, हंसके सहेगा ग़म ये,
जितना परेशां होगा, चाहत भी तो बढ़ेगी,
जो ज़ख्म भी मिले तो, दिल में है उनको रखा,
सहता रहूँगा हरदम, मोहब्बत न बदनाम होगी,
है प्यार में वफ़ा ही, जीने का इक सहारा,
जिंदगी तो अपनी, अब इसके नाम कर दी,
अब शिकवा नहीं है कोई, न रही कोई शिकायत,
मोहब्बत पे आज हमने, अपनी वफ़ा है लिख दी